sherKuch Alfaaz
आबियारी से हमारी बाग तब उन का खिला था पतझड़ों सी ज़िन्दगी को साथ ले जब वो मिला था रौशनी देकर उसे हम तीरगी में जी रहे हैं सुब्ह मेरी ले गया वो शब के जैसे जो मिला था
Gulshan Gulzar0 Likes
आबियारी से हमारी बाग तब उन का खिला था पतझड़ों सी ज़िन्दगी को साथ ले जब वो मिला था रौशनी देकर उसे हम तीरगी में जी रहे हैं सुब्ह मेरी ले गया वो शब के जैसे जो मिला था