sherKuch Alfaaz

आदमी मीठी ज़बाँ भूल गया तौबा है रस्ते में अपना मकाँ भूल गया तौबा है माटी के घर को सजाने में लगा है दिन रात उस को रहना है वहाँ भूल गया तौबा है