sherKuch Alfaaz

आँखें सब कुछ बोल ही देती हैं अब दर्द में रो और भी देती हैं अब बस बहुत से हैं मुखौटे अब यहाँ पाक कर वो छूते ही देती हैं अब शख़्स इक बीमार था छूने से फिर कर मरज़ सब दूर भी देती हैं अब