sherKuch Alfaaz

आँखें तरस रही हैं जज़्बे पिघल रहे हैं अनफ़ास को हमारे लम्हे निगल रहे हैं जज़्बात के शजर पर बरसात है ग़मों की एहसास के सफ़र में हम रुख़ बदल रहे हैं