sherKuch Alfaaz
आता है हक़ीक़त पे तसव्वुर मुझे लेकिन आया न यक़ीं मुझ को के देखे है तिरी याद बैठा हूँ अगर जब भी किसी रोड़ किनारे आँखों से मिरी धूल से झलके है तिरी याद
salman khan "samar"0 Likes
आता है हक़ीक़त पे तसव्वुर मुझे लेकिन आया न यक़ीं मुझ को के देखे है तिरी याद बैठा हूँ अगर जब भी किसी रोड़ किनारे आँखों से मिरी धूल से झलके है तिरी याद