sherKuch Alfaaz

आता है हक़ीक़त पे तसव्वुर मुझे लेकिन आया न यक़ीं मुझ को के देखे है तिरी याद बैठा हूँ अगर जब भी किसी रोड़ किनारे आँखों से मिरी धूल से झलके है तिरी याद