आबाद रहेंगे वीराने शादाब रहेंगी ज़ंजीरें जब तक दीवाने ज़िंदा हैं फूलेंगी फलेंगी ज़ंजीरें आज़ादी का दरवाज़ा भी ख़ुद ही खोलेंगी ज़ंजीरें टुकड़े टुकड़े हो जाएँगी जब हद से बढ़ेंगी ज़ंजीरें जब सब के लब सिल जाएँगे हाथों से क़लम छिन जाएँगे बातिल से लोहा लेने का एलान करेंगी ज़ंजीरें अंधों बहरों की नगरी में यूँँ कौन तवज्जोह करता है माहौल सुनेगा देखेगा जिस वक़्त बजेंगी ज़ंजीरें जो ज़ंजीरों से बाहर हैं आज़ाद उन्हें भी मत समझो जब हाथ कटेंगे ज़ालिम के उस वक़्त कटेंगी ज़ंजीरें ज़ंजीरें तो कट जाएँगी हाँ उन के निशाँ रह जाएँगे मेरा क्या है ज़ालिम तुझ को बदनाम करेंगी ज़ंजीरें ये दौर भी हैं सय्यादी के ये ढंग भी हैं जल्लादी के सिमटेगी सिकुड़ेंगी ज़ंजीरें फैलेंगी फलेंगी ज़ंजीरें ले दे के 'हफ़ीज़' उन सेे ही थी उम्मीद-ए-वफ़ा दीवानों को क्या होगा जब दीवानों से नाता तोड़ेंगी ज़ंजीरें
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