Kuch Alfaaz

आग़ाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता जब ज़ुल्फ़ की कालक में घुल जाए कोई राही बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता हँस हँस के जवाँ दिल के हम क्यूँँ न चुनें टुकड़े हर शख़्स की क़िस्मत में इनआ'म नहीं होता दिल तोड़ दिया उस ने ये कह के निगाहों से पत्थर से जो टकराए वो जाम नहीं होता दिन डूबे है या डूबेबारात लिए कश्ती साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता

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