आख़िर तो डूबना ही था काग़ज़ की नाव को इल्ज़ाम देते रहिए नदी के बहाव को दिल के धुऐं को आँखों में आने नहीं दिया आसाँ नहीं था साधना इस रख-रखाव को बन आई जाँ पे जब पड़ा सामान बाँधना मंज़िल समझ के बैठ गए थे पड़ाव को
Create Imageआख़िर तो डूबना ही था काग़ज़ की नाव को इल्ज़ाम देते रहिए नदी के बहाव को दिल के धुऐं को आँखों में आने नहीं दिया आसाँ नहीं था साधना इस रख-रखाव को बन आई जाँ पे जब पड़ा सामान बाँधना मंज़िल समझ के बैठ गए थे पड़ाव को
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