Kuch Alfaaz

आँखों के साथ उसे मिरा हँसना नहीं पसंद दरिया हो या हो घाव उसे गहरा नहीं पसंद तारीख़ आ चुकी है उधर कार्ड छप गए अब कब कहेगी तुझ को वो लड़का नहीं पसंद तुम को तो मुझ से गुफ़्तुगू करना पसंद था अब क्यूँ मिरी मज़ार पे रुकना नहीं पसंद कपड़ों से इत्र तक या किताबों से हार तक वो बोले तो सही कि उसे क्या नहीं पसंद इक दिन पड़ा मिला था मुझे रास्तों पे और इक दिन सुना उसे मिरा छूना नहीं पसंद

WhatsAppXTelegram
Create Image