आसान तो ये कार-ए-वफ़ा होता नहीं है कहने को तो कहते हैं किया होता नहीं है अव्वल तो मैं नाराज नहीं होता हूँ लेकिन हो जाऊँ तो फिर मुझ सा बुरा होता नहीं है ग़ुस्से में तो वो मां की तरहा होता है बिल्कुल लगता है खफा सच में खफा होता नहीं है तुम मेरे लिए जंग करोगे अरे छोड़ो तुम सेे तो मियाँ मिलने भी आ होता नहीं है हम अपनी मोहब्बत में समझ ले तो समझ ले वैसे किसी बंदे में ख़ुदा होता नहीं है कहते हैं ख़ुदा वो है की जो कह दे तो सब हो वैसे मेरे कहने से भी क्या होता नहीं है ईमान है या चाँद को लाना है ज़मीं पर कहते हो कि ले आता हूँ ला होता नहीं है मुझ पर जो अली ख़ास करम है तो मेरे दोस्त हर दिल भी तो मुझ जैसा सिया होता नहीं है
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