Kuch Alfaaz

अब किसे चाहें किसे ढूँडा करें वो भी आख़िर मिल गया अब क्या करें हल्की हल्की बारिशें होती रहीं हम भी फूलों की तरह भीगा करें आँख मूँदे उस गुलाबी धूप में देर तक बैठे उसे सोचा करें दिल मोहब्बत दीन दुनिया शाइ'री हर दरीचे से तुझे देखा करें घर नया कपड़े नए बर्तन नए इन पुराने काग़ज़ों का क्या करें

Bashir Badr
WhatsAppXTelegram
Create Image