Kuch Alfaaz

अब उस का वस्ल महँगा चल रहा है तो बस यादों पे ख़र्चा चल रहा है मोहब्बत दो-क़दम पर थक गई थी मगर ये हिज्र कितना चल रहा है बहुत ही धीरे धीरे चल रहे हो तुम्हारे ज़ेहन में क्या चल रहा है बस इक ही दोस्त है दुनिया में अपना मगर उस से भी झगड़ा चल रहा है दिलों को तोड़ने का फ़न है तुम में तुम्हारा काम कैसा चल रहा है सभी यारों के मक़्ते हो चुके हैं हमारा पहला मिस्रा चल रहा है ये 'ताबिश' क्या है बस इक खोटा सिक्का मगर ये खोटा सिक्का चल रहा है

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