अब उस जानिब से इस कसरत से तोहफ़े आ रहे हैं के घर में हम नई अलमारियाँ बनवा रहे हैं। हमें मिलना तो इन आबादियों से दूर मिलना उस सेे कहना गए वक़्तू में हम दरिया रहे हैं। तुझे किस किस जगह पर अपने अंदर से निकालें हम इस तस्वीर में भी तुझ से मिल के आ रहे हैं। हजारों लोग उस को चाहते होंगे हमें क्या के हम उस गीत में से अपना हिस्सा गा रहे हैं। बुरे मौसम की कोई हद नहीं तहजीब हाफ़ी फ़ज़ा आई है और पिंजरों में पर मुरझा रहे हैं।
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