Kuch Alfaaz

अच्छा है तू ने इन दिनों देखा नहीं मुझे दुनिया ने तेरे काम का छोड़ा नहीं मुझे हाँ ठीक है मैं भूला हुआ हूँ जहान को लेकिन ख़याल अपना भी होता नहीं मुझे अब अपने आँसुओं पे है सैराबी-ए-हयात कुछ और इस फ़लक पे भरोसा नहीं मुझे है मेहरबाँ कोई जो किए जा रहा है काम वर्ना मआश का तो सलीक़ा नहीं मुझे ऐ रह-गुज़ार-ए-सिलसिला-ए-इश्क़-ए-बे-लगाम जाना कहाँ है तू ने बताया नहीं मुझे है तो मिरा भी नाम सर-ए-फ़हरिस-ए-जुनूँ लेकिन अभी किसी ने पुकारा नहीं मुझे

Faizi
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