Kuch Alfaaz

ऐ फूल बेचने वाले तुझे गुमान भी है कि तेरे शहर में तेज़ाब की दुकान भी है हमारे दिल में कभी पाँव के निशान बना कि इस सड़क की तरफ़ तीर का निशान भी है ये आसमान अगर साएबान है तेरा तो भूल मत कि किसी का ये पायदान भी है जब आज उस ने बताया तो मुझ को याद आया यही कि उस की गली में मेरा मकान भी है

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