Kuch Alfaaz

ऐसा कभी भी हम ने इरादा नहीं किया घर जाके उस के कोई तमाशा नहीं किया हम जब भी पूछते हैं उन्हें धोखे का सबब कहते हैं तुम ने इश्क़ ज़ियादा नहीं किया क्या ग़म कि इश्क़ ने हमें बर्बाद कर दिया पर हम ने कोई काम अधूरा नहीं किया अंजाम पहले से ही बताया था लोगों ने हम ने मगर किसी का भरोसा नहीं किया तुझ सेे जुदा हो कर भी तिरा ही रहा हूँ मैं इक पल किसी भी ग़ैर पे ज़ाया' नहीं किया वो शख़्स जिस को फ़ख़्र था अपनी ज़बान पर उस ने तो एक वा'दा भी पूरा नहीं किया

Harsh saxena
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