Kuch Alfaaz

ऐसी शदीद रौशनी मैं जल मरूँगा मैं इतने हसीं शख़्स को कैसे सहूँगा मैं मुझ से मेरा वजूद तो साबित नहीं हुआ तू आँख भर के देख ले होने लगूँगा मैं मैं मरकज़े से दूर हूँ पर दायरे मैं हूँ ज़िंदा रहा तो तेरे गले आ लगूँगा मैं मैं वो अजीब शख़्स हूँ के चंद रोज़ तक पागल न कर सका तो उसे मार दूँगा मैं

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