अजनबी राह पर खड़ा हूँ मैं इस का मतलब भटक गया हूँ मैं रेड-बुल सी ही फुर्ती मिलती है उस के जब होठ चूमता हूँ मैं हिज्र के बा'द रोते-रोते अब बे-सबब हँसने भी लगा हूँ मैं ख़्वाहिशों वस्ल की हैँ मुझ को और हिज्र पर शे'र कह रहा हूँ मैं एक-दो-दो का इल्म है मुझ को है फ़ईलुन ये जानता हूँ मैं
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