Kuch Alfaaz

अपनी जैसी ही किसी शक्ल में ढालेंगे तुम्हें हम बिगड़ जाएँगे इतना की बना लेंगे तुम्हें जाने क्या कुछ हो छुपा तुम में मोहब्बत के सिवा हम तसल्ली के लिए फिर से खँगालेंगे तुम्हें हम ने सोचा है कि इस बार जुनूँ करते हुए ख़ुद को इस तरह से खो देंगे कि पा लेंगे तुम्हें मुझ में पैवस्त हो तुम यूँँ कि ज़माने वाले मेरी मिट्टी से मेरे बा'द निकालेंगे तुम्हें

WhatsAppXTelegram
Create Image