Kuch Alfaaz

और सुनाओ कैसे हो तुम अब तक पहले जैसे हो तुम अच्छा अब ये तो बतलाओ कैसे अपने जैसे हो तुम यार सुनो घबराते क्यूँ हो क्या कुछ ऐसे वैसे हो तुम क्या अब अपने साथ नहीं हो तो फिर जैसे तैसे हो तुम ऐश-परस्ती तुम से तौबा मज़दूरी के पैसे हो तुम

Vigyan Vrat
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