Kuch Alfaaz

बादशाहों को सिखाया है क़लंदर होना आप आसान समझते हैं मुनव्वर होना एक आँसू भी हुकूमत के लिए ख़तरा है तुम ने देखा नहीं आँखों का समुंदर होना सिर्फ़ बच्चों की मोहब्बत ने क़दम रोक लिए वर्ना आसान था मेरे लिए बे-घर होना हम को मा'लूम है शोहरत की बुलंदी हम ने क़ब्र की मिट्टी का देखा है बराबर होना इस को क़िस्मत की ख़राबी ही कहा जाएगा आप का शहर में आना मिरा बाहर होना सोचता हूँ तो कहानी की तरह लगता है रास्ते से मिरा तकना तिरा छत पर होना मुझ को क़िस्मत ही पहुँचने नहीं देती वर्ना एक ए'ज़ाज़ है उस दर का गदागर होना सिर्फ़ तारीख़ बताने के लिए ज़िंदा हूँ अब मिरा घर में भी होना है कैलेंडर होना

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