Kuch Alfaaz

बड़े हिसाब से इज़्ज़त बचानी पड़ती है हमेशा झूटी कहानी सुनानी पड़ती है तुम एक बार जो टूटे तो जुड़ नहीं पाए हमें तो रोज़ ये ज़िल्लत उठानी पड़ती है मुझे ख़रीदने ऐसे भी लोग आते हैं कि जिन के कहने से क़ीमत घटानी पड़ती है मलाल ये है कि ये दोनों हाथ मेरे हैं किसी की चीज़ किसी से छुपानी पड़ती है तुम अपना नाम बता कर ही छूट जाते हो हमें तो ज़ात भी अपनी बतानी पड़ती है

Haseeb Soz
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