Kuch Alfaaz

बाहर भी अब अंदर जैसा सन्नाटा है दरिया के उस पार भी गहरा सन्नाटा है शोर थमें तो शायद सदियाँ बीत चुकी हैं अब तक लेकिन सहमा सहमा सन्नाटा है किस से बोलूँ ये तो इक सहरा है जहाँ पर मैं हूँ या फिर गूँगा बहरा सन्नाटा है जैसे इक तूफ़ान से पहले की ख़ामोशी आज मिरी बस्ती में ऐसा सन्नाटा है नई सहर की चाप न जाने कब उभरेगी चारों जानिब रात का गहरा सन्नाटा है सोच रहे हो सोचो लेकिन बोल न पड़ना देख रहे हो शहर में कितना सन्नाटा है महव-ए-ख़्वाब हैं सारी देखने वाली आँखें जागने वाला बस इक अंधा सन्नाटा है डरना है तो अन-जानी आवाज़ से डरना ये तो 'आनिस' देखा-भाला सन्नाटा है

Aanis Moin
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