Kuch Alfaaz

बस यही कुछ है मर्तबा मिरे पास एक तू है और इक दुआ मिरे पास तुझे कुछ वक़्त चाहिए मिरी जान वक़्त ही तो नहीं बचा मिरे पास रौशनी हिफ़्ज़ हो चुकी है मुझे रख गया था कोई दिया मिरे पास ये तिरी गुफ़्तुगू का लम्हा है इस घड़ी है मिरा ख़ुदा मिरे पास टहनियाँ झुक रही थीं तेरे लिए और फल टूट के गिरा मिरे पास एक रूमाल आँसुओं से भरा और इक ख़त जला हुआ मिरे पास तेरा नेमुल-बदल नहीं कोई तू फ़क़त एक ही तो था मिरे पास अब मैं झगड़ा करूँँ तो किस से करूँँ अब तो तू भी नहीं रहा मिरे पास

WhatsAppXTelegram
Create Image