Kuch Alfaaz

बह गई याद उस की पानी में अब बचा क्या है ज़िंदगानी में आप ने ग़ौर से पढ़ा ही नहीं हम भी मौजूद थे कहानी में काश तुम सेे मिलें किसी दिन यूँँ जैसे मिलता है पानी पानी में

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