Kuch Alfaaz

भुला दिया था जिस को एक शाम याद आ गया ग़ज़ाल देख कर वो ख़ुश-ख़िराम याद आ गया ख़ुदा का शुक्र है कि साँस टूटने से पेशतर वो शक्ल याद आ गई वो नाम याद आ गया वो जिस की ज़ुल्फ़ आँचलों की छाँव को तरस गई शब-ए-विसाल उस को एहतिराम याद आ गया मैं आज तापसी की एक फ़िल्म देख कर हटा तो मुझ को इक पुराना इंतिक़ाम याद आ गया

Tehzeeb Hafi
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