Kuch Alfaaz

बुझ गया रात वो सितारा भी हाल अच्छा नहीं हमारा भी ये जो हम खोए खोए रहते हैं इस में कुछ दख़्ल है तुम्हारा भी डूबना ज़ात के समुंदर में है ये तूफ़ान भी किनारा भी अब मुझे नींद ही नहीं आती ख़्वाब है ख़्वाब का सहारा भी लोग जीते हैं किस तरह 'अजमल' हम से होता नहीं गुज़ारा भी

Ajmal Siraj
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