Kuch Alfaaz

बुझती नहीं ये प्यास है ये दिल बहुत उदास है कटती रहेगी ज़िंदगी इक याद मेरे पास है जाते हुए ही फेंक दे मन में जो भी भड़ास है ग़म दिल के सब उतर सके इक जाम है गिलास है आँखों पे पर्दे हैं यहाँ सरकार बे-लिबास है

Nakul kumar
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