Kuch Alfaaz

बुलाती है मगर जाने का नहीं ये दुनिया है इधर जाने का नहीं मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर मगर हद से गुज़र जाने का नहीं ज़मीं भी सर पे रखनी हो तो रखो चले हो तो ठहर जाने का नहीं सितारे नोच कर ले जाऊँगा मैं ख़ाली हाथ घर जाने का नहीं वबा फैली हुई है हर तरफ़ अभी माहौल मर जाने का नहीं वो गर्दन नापता है नाप ले मगर जालिम से डर जाने का नहीं

Rahat Indori
WhatsAppXTelegram
Create Image