Kuch Alfaaz

चांदनी में रात भर सारा जहांअच्छा लगा धूप जब फैली तो अपना ही मकांअच्छा लगा अब तो ये एहसास भी बाक़ी नहीं है दोस्तों किस जगह हम मुज़महिल थे और कहांअच्छा लगा आके अब ठहरे हुए पानी से दिलचस्पी हुई एक मुद्दत तक हमें आबे रवांअच्छा लगा लुट गए जब रास्ते में जाके तब आँखें खुली पहले तो एख़लाक़-ए-मीर कारवांअच्छा लगा जब हक़ीक़त सामने आई तो हैरत में पड़े मुद्दतों हम को भी हुस्ने दास्तांअच्छा लगा

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