Kuch Alfaaz

छोटी सी बे-रुख़ी पे शिकायत की बात है और वो भी इस लिए कि मोहब्बत की बात है मैं ने कहा कि आए हो कितने दिनों के बा'द कहने लगे हुज़ूर ये फ़ुर्सत की बात है मैं ने कहा कि मिल के भी हम क्यूँँ न मिल सके कहने लगे हुज़ूर ये क़िस्मत की बात है मैं ने कहा कि रहते हो हर बात पर ख़फ़ा कहने लगे हुज़ूर ये क़ुर्बत की बात है मैं ने कहा कि देते हैं दिल तुम भी लाओ दिल कहने लगे कि ये तो तिजारत की बात है मैं ने कहा कभी है सितम और कभी करम कहने लगे कि ये तो तबीअ'त की बात है

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