Kuch Alfaaz

देखना तुझे मेरी बद-दुआ' लगेगी दोस्त तेरे ज़ख़्मों को भी खारी हवा लगेगी दोस्त चाहते हो मैं सब कुछ भूल जाऊँ पर इस में एक जिस्म के मिलने से दवा लगेगी दोस्त मसअला ये ही तो है इश्क़ का कि जिस को मैं देता बद-दुआ' उस को भी दुआ लगेगी दोस्त एक आख़िरी ख़त पढ़ कर के जा कि जिस में मैं लिखता था मेरी बेटी तेरी क्या लगेगी दोस्त वो नहीं लगी बिल्कुल भी मुझे मेरी अपनी देख कर जिसे मुझ को था लगा, लगेगी दोस्त जो मोहब्बतों को तदबीर कहते हैं 'साहिर' एक दिन मुहब्बत उन को वबा लगेगी दोस्त

Saahir
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