देखिए मायूस चेहरे पर हँसी की हाज़िरी दिल में जब हो जाए धोके से ख़ुशी की हाज़िरी अब ख़ुदा जाने कि हो अन्जाम क्या नादान का शाख़ पर है फूल की सूरत कली की हाज़िरी कैसे लफ़्ज़ों में बयाँ हो पाए ये मन्ज़र हसीं आस्मा पर चाँद घर में चाँदनी की हाज़िरी एक तो आँखें मुशर्रफ़ होंगी उन की दीद से और हो जाएगी ऐसे हाज़िरी की हाज़िरी करते हैं दो प्यार करने वाले जब आपस में बात अच्छी लगती है कहाँ उस दम किसी की हाज़िरी उस गली में कोई मुझ को जानने वाला नहीं मुद्दतों मैं ने लगाई जिस गली की हाज़िरी बा अदब हो कर खड़े हैं हाज़िरे दरबार सब ज़िंदगानी ले रही है अब सभी की हाज़िरी उस हसीं चेहरे का ही फ़ैज़ान है काशिफ़ अदीब ज़ेहन में होने लगी है शा'इरी की हाज़िरी
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