Kuch Alfaaz

दिल में बे-नाम सी ख़ुशी है अभी ज़िंदगी मेरे काम की है अभी मैं भी तुझ से बिछड़ के सरगर्दां तेरी आँखों में भी नमी है अभी दिल की सुनसान रहगुज़ारों पर मैं ने इक चीख़ सी सुनी है अभी मैं ने माना बहुत अँधेरा है फिर भी थोड़ी सी रौशनी है अभी अपने आँसू 'अमीर' क्यूँँ पोंछूँ इन चराग़ों में रौशनी है अभी

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