Kuch Alfaaz

दिल से ख़याल-ए-दोस्त भुलाया न जाएगा सीने में दाग़ है कि मिटाया न जाएगा तुम को हज़ार शर्म सही मुझ को लाख ज़ब्त उल्फ़त वो राज़ है कि छुपाया न जाएगा ऐ दिल रज़ा-ए-ग़ैर है शर्त-ए-रज़ा-ए-दोस्त ज़िन्हार बार-ए-इश्क़ उठाया न जाएगा देखी हैं ऐसी उन की बहुत मेहरबानियाँ अब हम से मुँह में मौत के जाया न जाएगा मय तुंद ओ ज़र्फ़-ए-हौसला-ए-अहल-ए-बज़्म तंग साक़ी से जाम भर के पिलाया न जाएगा राज़ी हैं हम कि दोस्त से हो दुश्मनी मगर दुश्मन को हम से दोस्त बनाया न जाएगा क्यूँँ छेड़ते हो ज़िक्र न मिलने का रात के पूछेंगे हम सबब तो बताया न जाएगा बिगड़ें न बात बात पे क्यूँँ जानते हैं वो हम वो नहीं कि हम को मनाया न जाएगा मिलना है आप से तो नहीं हस्र ग़ैर पर किस किस से इख़्तिलात बढ़ाया न जाएगा मक़्सूद अपना कुछ न खुला लेकिन इस क़दर या'नी वो ढूँडते हैं जो पाया न जाएगा झगड़ों में अहल-ए-दीं के न 'हाली' पड़ें बस आप क़िस्सा हुज़ूर से ये चुकाया न जाएगा

WhatsAppXTelegram
Create Image