Kuch Alfaaz

दो नावों पर पाँव पसारे ऐसे कैसे वो भी प्यारा हम भी प्यारे ऐसे कैसे सूरज बोला बिन मेरे दुनिया अंधी है हँस कर बोले चाँद सितारे ऐसे कैसे तेरे हिस्से की ख़ुशियों से बैर नहीं पर मेरे हक़ में सिर्फ़ ख़सारे ऐसे कैसे गालों पर बोसा दे कर जब चली गई वो कहते रह गए होंठ बिचारे ऐसे कैसे मुझ जैसों को यां पर देख के कहते हैं वो इतना आगे बिना सहारे ऐसे कैसे जैसे ही मक़्ते पर पहुँची ग़ज़ल असद की बोल उठे सारे के सारे ऐसे कैसे

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