Kuch Alfaaz

दुश्मनी से या किसी को दोस्ती से ख़ौफ़ है आदमी को अब तो केवल आदमी से ख़ौफ़ है आप ये कहते हैं मुझ सेे 'डर नहीं मैं साथ हूँ' सच तो ये है यार मुझ को आप ही से ख़ौफ़ है मेरी बर्बादी का क़िस्सा सुन लिया था इक दफ़ा बस तभी से आशिक़ों को आशिक़ी से ख़ौफ़ है चमचमाती आप की दुनिया मुबारक़ आप को हम तो अंधे हैं सो हम को रौशनी से ख़ौफ़ है लाख सब कहते रहें 'इस ज़िंदगी से इश्क़ है' पर हक़ीक़त ये है 'सब को ज़िंदगी से ख़ौफ़ है' इस तरह डरने लगे हैं हम तुम्हारे इश्क़ से जिस तरह से मुजरिमों को हथकड़ी से ख़ौफ़ है

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