एक आईना रू-ब-रू है अभी उस की ख़ुश्बू से गुफ़्तुगू है अभी वही ख़ाना-ब-दोश उम्मीदें वही बे-सब्र दिल की ख़ू है अभी दिल के गुंजान रास्तों पे कहीं तेरी आवाज़ और तू है अभी ज़िंदगी की तरह ख़िराज-तलब कोई दरमाँदा आरज़ू है अभी बोलते हैं दिलों के सन्नाटे शोर सा ये जो चार-सू है अभी ज़र्द पत्तों को ले गई है हवा शाख़ में शिद्दत-ए-नुमू है अभी वर्ना इंसान मर गया होता कोई बे-नाम जुस्तुजू है अभी हम-सफ़र भी हैं रहगुज़र भी है ये मुसाफ़िर ही कू-ब-कू है अभी
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