Kuch Alfaaz

हाँ मददगार की ज़रूरत है छत हूँ दीवार की ज़रूरत है आप की नफ़रतें बताती हैं आप को प्यार की ज़रूरत है तुम तो लफ़्ज़ों से मार देते हो तुम को हथियार की ज़रूरत है? जीत ने अंधा कर दिया है तुझे तुझ को इक हार की ज़रूरत है एक बिस्तर का इश्तिहार पढ़ा एक बीमार की ज़रूरत है मैं भी एक बार था ज़रूरी उसे तू भी इक बार की ज़रूरत है इश्क़ तो एक से ही होता है तुझ को दो चार की ज़रूरत है

Varun Anand
WhatsAppXTelegram
Create Image