Kuch Alfaaz

हम कहाँ हैं ये पता लो तुम भी बात आधी तो सँभालो तुम भी दिल लगाया ही नहीं था तुम ने दिल-लगी की थी मज़ा लो तुम भी हम को आँखों में न आँजो लेकिन ख़ुद को ख़ुद पर तो सजा लो तुम भी जिस्म की नींद में सोने वालों रूह में ख़्वाब तो पालो तुम भी

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