Kuch Alfaaz

हम क्यूँँ ये कहें कोई हमारा नहीं होता मौजों के लिए कोई किनारा नहीं होता दिल टूट भी जाए तो मोहब्बत नहीं मिटती इस राह में लुट कर भी ख़सारा नहीं होता सरमाया-ए-शब होते हैं यूँँ तो सभी तारे हर तारा मगर सुब्ह का तारा नहीं होता अश्कों से कहीं मिटता है एहसास-ए-तलव्वुन पानी में जो घुल जाए वो पारा नहीं होता सोने की तराज़ू में मिरा दर्द न तौलो इमदाद से ग़ैरत का गुज़ारा नहीं होता तुम भी तो 'मुज़फ़्फ़र' की किसी बात पे बोलो शाएर का ही लफ़्ज़ों पे इजारा नहीं होता

WhatsAppXTelegram
Create Image