Kuch Alfaaz

हमारे बा'द अब महफ़िल में अफ़्साने बयाँ होंगे बहारें हम को ढूँढेंगी न जाने हम कहाँ होंगे इसी अंदाज़ से झूमेगा मौसम गाएगी दुनिया मोहब्बत फिर हसीं होगी नज़ारे फिर जवाँ होंगे न हम होंगे न तुम होगे न दिल होगा मगर फिर भी हज़ारों मंज़िलें होंगी हज़ारों कारवाँ होंगे

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