Kuch Alfaaz

हमारे साथ कोई मसअला फुरात का है वगरना इल्म उसे अपनी मुश्किलात का है मेरे हिसाब से माज़ुरी हुस्न है मेरा अगर ये ऐब है तो भी ख़ुदा के हाथ का है इक आधे काम के ह़क़ में तो ख़ैर मैं भी हूँ तुम्हारे पास तो दफ़्तर शिफारिशात का है हमारी बात का जितना वसीअ पहलू है ज़बाँ पे लाने में नुक़सान काइ‌नात का है हम उस के होने ना होने पे कितना लड़ रहे हैं किसी के वास्ते ये खेल नफ्सियात का है

Zia Mazkoor
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