Kuch Alfaaz

हमारी छोटी सी एक ख़्वाहिश क़ुबूल कर ले फिर उस के बदले में जो भी चाहे वसूल कर ले जिसे भी चाहे बिठाए सर पे घुमाए दुनिया जिसे भी चाहे तू अपने पैरों की धूल कर ले वहाँ तू ख़्वाहिश की बारगाह में झुका हुआ था यहाँ मुहब्बत के ज़ाविए को असूल कर ले अभी तुझे दीन दुनियादारी कहाँ पता है अभी तो कुछ भी नहीं गया कोई भूल कर ले

WhatsAppXTelegram
Create Image