Kuch Alfaaz

हमेशा ज़िंदगी की हर कमी को जीते रहते हैं जिसे हम जी नहीं पाए उसी को जीते रहते हैं हमारे दुख की बारिश को कोई दामन नहीं मिलता हमारी आँख के बादल नमी को जीते रहते हैं किसी के साथ हैं रस्में किसी के साथ हैं क़स में किसी के साथ जीना है किसी को जीते रहते हैं हमें मा'लूम है इक दिन भरोसा टूट जाएगा मगर फिर भी सराबों में नदी को जीते रहते हैं हमारे साथ चलती है तुम्हारे प्यार की ख़ुशबू लगाई थी जो तुम ने उस लगी को जीते रहते हैं चहकते घर महकते खेत और वो गाँव की गलियाँ जिन्हें हम छोड़ आए उन सभी को जीते रहते है ख़ुदा के नाम-लेवा हम भी हैं तुम भी हो और वो भी मगर अफ़सोस सब अपनी ख़ुदी को जीते रहते हैं

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