Kuch Alfaaz

हम ने तुझ पर कोई इल्ज़ाम नहीं आने दिया इक ग़ज़ल में भी तेरा नाम नहीं आने दिया तू ने इक दिन हमें नाकाम कहा और हम ने ख़ुद को अपने भी किसी काम नहीं आने दिया इक निशानी भी फ़रामोश नहीं की उस की एक भी ज़ख़्म को आराम नहीं आने दिया अपनी पलकों में छुपाए रखे आँसू अपने इक सितारा भी लब-ए-बाम नहीं आने दिया ज़िन्दगी इस लिए पुर-कैफ़ कटी है 'सरवर' दिल में अंदेशा-ए-अंजाम नहीं आने दिया

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