Kuch Alfaaz

हर कदम पर जो इतना रोते हो किस तमन्ना का बोझ ढोते हो हर किसी से गुरेज क्या मतलब आज कल किस हवा में होते हो इस का मतलब है देख ली दुनिया बात करने से पहले रोते हो चाँद पर जा बसोगे क्या तुम सब नफ़रतें इस क़दर जो बोते हो ये ख़ुदाई सिफ़त भी है तुम में दूर रह कर क़रीब होते हो तुम अज़ीयत पसंद हो 'खालिद' अपने अश्कों से ज़ख़्म धोते ही

WhatsAppXTelegram
Create Image