हो गया आप का आगमन नींद में छू कर गुज़री मुझ को जो पवन नींद में मुझ को फूलों की वर्षा में नहला गया मुस्कुराता हुआ इक गगन नींद में कैसे उद्धार होगा मेरे देश का लोग करते है चिंतन मनन नींद में
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