आओ देखें क्या होता है बहुत बनाए बाँध नदी में बहुत चलाए हाथ नदी में ख़ुद को धारा में कुदवाकर आओ देखें क्या होता है हाथ गगन में उठा कर देखा तारों को चाहकर देखा बैठ ज़मीं पे सर को झुकाए आओ देखें क्या होता है ख़्वाहिशों की नाँव बनाई कोशिशें पतवार हुई फिर भी न दरिया पार हुई नियति की अब पाल चढ़ाकर मौजों में ख़ुद को बहाकर आओ देखें क्या होता है
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