Kuch Alfaaz

आँख खुली तो तब जाना मेरी मुहब्बत थी इक फसाना जो भी था जैसा भी था वो ख़्वाब था बड़ा सुहाना जीना कितना मुश्किल था उस ने कभी ना जाना ज़िन्दगी उसी को कहते हैं ना कुछ खोना ना कुछ पाना

Kumar Rishi
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