आँख खुली तो तब जाना मेरी मुहब्बत थी इक फसाना जो भी था जैसा भी था वो ख़्वाब था बड़ा सुहाना जीना कितना मुश्किल था उस ने कभी ना जाना ज़िन्दगी उसी को कहते हैं ना कुछ खोना ना कुछ पाना
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